Friday, October 16, 2026
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पौड़ी में 40 सरकारी स्कूलों पर लटके ताले

पौड़ी: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से जारी पलायन और गांवों में घटती आबादी का सीधा असर अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी बच्चों की किलकारियों और चहल-पहल से गुलजार रहने वाले सरकारी स्कूलों में अब सन्नाटा पसरा हुआ है। आलम यह है कि कई विद्यालयों में छात्र संख्या पूरी तरह शून्य हो जाने के कारण ताले लटक गए हैं और नए शैक्षणिक सत्र में इन्हें बंद करना पड़ा है। पौड़ी जिले में भी यही स्थिति सामने आई है, जहां छात्र संख्या शून्य होने के कारण कुल 40 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। इनमें 32 प्राथमिक और आठ उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।

पौड़ी जिले के तमाम गांवों में बच्चों की घटती संख्या और परिवारों के शहरों की ओर पलायन ने सरकारी स्कूलों के अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल एक हजार दो सौ सत्तानवे प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से बत्तीस विद्यालय ऐसे हैं जहां नए शैक्षणिक सत्र में एक भी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया। वहीं, जिले के दो सौ इकतीस उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से आठ में छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई। इसके चलते जिले के विभिन्न विकासखंडों में कुल चालीस विद्यालय बंद हो चुके हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि दूरस्थ गांवों में आबादी लगातार कम हो रही है और शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

नए शैक्षणिक सत्र दो हजार छब्बीस-सत्ताईस में जिले के कई विकासखंडों में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। विकासखंडवार उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पौड़ी, यमकेश्वर और बीरोंखाल में पांच-पांच विद्यालय बंद हुए हैं। एकेश्वर, कल्जीखाल, थलीसैंण और पाबौ में तीन-तीन, जबकि द्वारीखाल, कोट, पोखड़ा, दुगड्डा और जयहरीखाल में दो-दो विद्यालय बंद हुए हैं। खिर्सू, रिखणीखाल और नैनीडांडा में एक-एक विद्यालय में ताला लगा है। प्राथमिक विद्यालयों की बात करें तो बीरोंखाल विकासखंड में सबसे ज्यादा पांच स्कूल बंद हुए हैं। पौड़ी और यमकेश्वर में चार-चार, जबकि एकेश्वर, द्वारीखाल, कोट, कल्जीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पोखड़ा और दुगड्डा में दो-दो प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। खिर्सू, जयहरीखाल और नैनीडांडा में एक-एक प्राथमिक विद्यालय बंद हुआ है। उच्च प्राथमिक स्तर पर एकेश्वर, यमकेश्वर, कल्जीखाल, रिखणीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी और जयहरीखाल विकासखंड में एक-एक विद्यालय बंद हुआ है।

इन बंद हुए विद्यालयों में शिक्षा विभाग के अनुसार एकेश्वर विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय डियूल्ड, पुसोली और उच्च प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल बंद हुए हैं। यमकेश्वर में प्राथमिक विद्यालय पलेलगांव, पैंया, उमड़ा और नांद के साथ उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपड़ा कस्याली बंद हुआ है। द्वारीखाल में प्राथमिक विद्यालय घंडालू और खेड़ा, जबकि बीरोंखाल में प्राथमिक विद्यालय तनकिला, गाडखर्क, रतकोट, सुंदरखाल और चौंडी बंद हुए हैं। कोट विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय सैंज और कंडोला में ताले लगे हैं। कल्जीखाल में प्राथमिक विद्यालय बूंगा-दो और बलोद तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय पलाई बंद हुआ है। खिर्सू में प्राथमिक विद्यालय मुसोली, जबकि थलीसैंण में प्राथमिक विद्यालय खरकासारी, कुवाखर्क और उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई बंद हुआ है।

रिखणीखाल में उच्च प्राथमिक विद्यालय मेलधार, पाबौ में प्राथमिक विद्यालय कोटा और कलुण तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय कुई बंद हुए हैं। पोखड़ा में प्राथमिक विद्यालय चमनाऊ और पोखड़ा बंद हुए हैं। पौड़ी विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय गजेंद्रपुर, चांदखेत, डोबल्या, थपलियालगांव और उच्च प्राथमिक विद्यालय कड़ाकोट बंद हुआ है। दुगड्डा में प्राथमिक विद्यालय गढ़सिर और केष्टा, जयहरीखाल में प्राथमिक विद्यालय मोली तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय रैतपुर और नैनीडांडा में प्राथमिक विद्यालय झुडंगू बंद हुआ है।

दूरस्थ गांवों में लगातार कम होती आबादी और परिवारों के पलायन के कारण सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बनाए रखना शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कई गांवों में बच्चों की संख्या इतनी कम हो गई है कि विद्यालयों में नए प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि बेहतर शैक्षणिक माहौल और गुणवत्ता आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।

जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) पौड़ी अंशुल बिष्ट ने कहा कि पौड़ी के कई गांवों में पलायन के कारण बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए गुणवत्ता पूरक शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत बीआरसी और सीआरसी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिले में कुछ नए खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती होने से विद्यालयों में सुधारात्मक कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी। विभाग की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में विद्यालयों में छात्र संख्या के ग्राफ में भी सुधार होने की उम्मीद है।

पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन की समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसका प्रभाव अब शिक्षा व्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। गांव खाली हो रहे हैं, स्कूल बंद हो रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना चुनौती बन गया है। शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में स्थिति में कुछ सकारात्मक बदलाव आ सकेगा, लेकिन फिलहाल कई गांवों में स्कूलों के ताले लटके रहना पलायन की गंभीरता को रेखांकित कर रहे हैं।

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