देहरादून: उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, हरी-भरी वादियां और विविध लोकेशन फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी हैं। इसी कारण राज्य में साल-दर-साल फिल्मों की शूटिंग की संख्या बढ़ती जा रही है। उत्तराखंड फिल्म डेवलपमेंट बोर्ड (यूटीडीबी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक के 7 वर्षों में 1331 से अधिक गढ़वाली, कुमाऊंनी, उड़िया और हिंदी फिल्मों की शूटिंग राज्य के विभिन्न स्थानों पर हो चुकी है। इन शूटिंग्स से राज्य की अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ है, क्योंकि फिल्मकारों ने यहां भारी धनराशि खर्च की है। साथ ही, सरकार की फिल्म नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को अनुदान भी प्रदान किया गया है।
विशेष रूप से वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 169 फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है। हालांकि, वर्ष 2023-24 में यह संख्या 234 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर रहा। गत दो वर्षों में क्रमशः 196 और 169 फिल्मों की शूटिंग हुई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि हालांकि संख्या में थोड़ी उतार-चढ़ाव है, लेकिन उत्तराखंड फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बना हुआ है।
उत्तराखंड को बेहतर फिल्म नीति और अन्य प्रयासों के लिए कई राष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुके हैं। वर्ष 2017 में 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राज्य को ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट-स्पेशल मेंशन’ प्राप्त हुआ। इसके बाद 2018 में 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का पुरस्कार मिला। साथ ही, 2017-18 में राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार भी राज्य के खाते में आया। ये सम्मान उत्तराखंड की फिल्म-फ्रेंडली नीतियों और सुविधाओं की सराहना हैं।
उत्तराखंड फिल्म पॉलिसी के तहत सरकार फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी प्रदान करती है। पॉलिसी के अनुसार, फिल्म निर्देशक और प्रोड्यूसर को अनुदान तभी मिलता है जब वे शपथ-पत्र दाखिल करें कि फिल्म की 75 प्रतिशत से अधिक शूटिंग राज्य के लोकेशंस पर हुई है। विभिन्न श्रेणियों जैसे क्षेत्रीय, हिंदी और अन्य भाषाओं की फिल्मों के लिए अलग-अलग मानदंड तय किए गए हैं। वर्ष 2022 से अब तक कई फिल्मों को शूटिंग के लिए सब्सिडी दी जा चुकी है। नई फिल्म नीति 2024 में सब्सिडी को और बढ़ाया गया है, जिसमें राज्य में खर्च की 50 प्रतिशत राशि या अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) फिल्म शूटिंग के लिए सबसे लोकप्रिय लोकेशन रहा है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009 से 2024 तक एफआरआई ने फिल्म शूटिंग से 1.11 करोड़ रुपये की आय अर्जित की। वर्ष 2023 में अकेले 32 लाख रुपये की कमाई हुई। वर्ष 2018 और 2019 में यह आय 18 से 22 लाख रुपये के बीच रही, जबकि कोरोना काल (2020-2021) में शूटिंग शून्य रहने से आय भी शून्य रही। हाल के वर्षों में एफआरआई में शूटिंग का दैनिक शुल्क लगभग 75 हजार रुपये तक रहा है।
उत्तराखंड फिल्म बोर्ड ने युवा फिल्मकारों को प्रोत्साहन देने के लिए स्कॉलरशिप भी प्रदान की है। अब तक चार युवाओं को स्कॉलरशिप दी जा चुकी है। इनमें रुचिता गुप्ता (नेहरू कॉलोनी) को 25 हजार रुपये, संजीव कुमार बिलवाल (निरंजनपुर माजरा) को 25 हजार रुपये, राज वर्मा (उधम सिंह नगर) को 1.90 लाख रुपये और शुभम शर्मा (रुड़की, हरिद्वार) को 25 हजार रुपये की स्कॉलरशिप प्रदान की गई है।
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर वादियां अब बड़े पैमाने पर फिल्म और वेब सीरीज के लिए प्रमुख डेस्टिनेशन बन रही हैं। सरकार की फिल्म नीति, सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम और सब्सिडी जैसी सुविधाओं ने राज्य को फिल्म इंडस्ट्री में मजबूत स्थिति दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग की संख्या और बढ़ेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार को और बल मिलेगा।
