देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। आईपीएस अधिकारी प्रमेन्द्र डोभाल ने आज एसएसपी देहरादून का पदभार ग्रहण किया। यह नियुक्ति हाल ही में हुए पुलिस विभाग के reshuffle का हिस्सा है, जिसमें पूर्व एसएसपी अजय सिंह को एसटीएफ का प्रमुख बनाया गया है। डोभाल, जो पहले हरिद्वार के एसएसपी थे, ने पद संभालते ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। उन्होंने महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और यातायात सुधार पर ठोस कदम उठाने का ऐलान किया। साथ ही, पुलिसकर्मियों के मनोबल को बढ़ाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही।
SSP डोभाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देहरादून में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और जनता में असुरक्षा की भावना फैल रही है। उन्होंने कहा, “देहरादून मेरे लिए नया नहीं है। मैं यहां की चुनौतियों से वाकिफ हूं। महिला सुरक्षा, लॉ एंड ऑर्डर और ट्रैफिक प्रबंधन लंबे समय से शहर की प्रमुख समस्याएं हैं। इन पर हमारी टीम विशेष ध्यान देगी।” डोभाल ने नागरिकों और मीडिया से सहयोग की अपील की और भरोसा दिलाया कि पुलिस हर संभव प्रयास करेगी ताकि शहर सुरक्षित और व्यवस्थित बने।
प्रमेन्द्र डोभाल का करियर
प्रमेन्द्र डोभाल उत्तराखंड कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने 2013 बैच में सेवा शुरू की और विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इससे पहले वे चमोली के एसपी रह चुके हैं, जहां उन्होंने पहाड़ी इलाकों की चुनौतियों का सामना किया। सितंबर 2023 में उन्हें हरिद्वार का एसएसपी बनाया गया था, जहां उन्होंने संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों और अपराधों से निपटने में अपनी क्षमता दिखाई। हरिद्वार में उनके कार्यकाल के दौरान गंभीर अपराधों पर नियंत्रण और राजनीतिक फ्लैशपॉइंट्स को संभालने की सराहना हुई। अब देहरादून की कमान संभालते हुए उन्हें शहरी अपराध, राजनीति और बढ़ती आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। यह पद उनके करियर का एक महत्वपूर्ण टेस्ट माना जा रहा है।
यह नियुक्ति उत्तराखंड सरकार के बड़े पुलिस reshuffle का हिस्सा है, जिसमें 14 आईपीएस और 6 पीपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया। हरिद्वार में नवनीत सिंह भुल्लर और ऊधम सिंह नगर में अजय गणपति को नया एसएसपी बनाया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव देहरादून में हाल की हत्याओं और अपराध की घटनाओं के बाद किया गया है।
देहरादून में बढ़ते अपराध
देहरादून में अपराध की स्थिति चिंताजनक है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 4,337 अपराधों में से 1,205 महिलाओं के खिलाफ थे, जो कुल अपराधों का 27% है। इनमें 8 दहेज हत्याएं, 13 आत्महत्या उकसाने के मामले और बलात्कार से जुड़ी घटनाएं शामिल हैं। 2025 में किडनैपिंग के मामलों में 144% की वृद्धि, हत्याओं में 5% और दंगों में 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। Numbeo के सर्वे में देहरादून का क्राइम इंडेक्स कम से मध्यम स्तर का है, लेकिन पिछले 5 वर्षों में अपराध बढ़ने की शिकायतें 70% से ज्यादा हैं।
महिला सुरक्षा की बात करें तो नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (NARI) 2025 में देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों में शुमार किया गया है। 31 शहरों में से यह 24वें स्थान पर है, जहां सेफ्टी इंडेक्स मात्र 60.6% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 64.6%। सर्वे में केवल 50% महिलाओं ने शहर को सुरक्षित माना। हाल की घटनाओं में रजपुर रोड पर जिम से लौटते युवक की गोली मारकर हत्या, दो युवतियों की अलग-अलग हत्याएं, और रुद्रपुर में 25 वर्षीय महिला का चलती कार में बलात्कार शामिल हैं। क्लेमेंट टाउन के जिम ट्रेनर पर महिलाओं से दुर्व्यवहार के आरोप लगे, जिसके बाद प्रदर्शन हुए। रिशिकेश रिसॉर्ट मर्डर केस (2022) अभी भी CBI जांच में है, जहां VIP की पहचान पर सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व एसएसपी अजय सिंह ने NARI सर्वे को चुनौती देते हुए कहा था कि देहरादून के अपराध दर मेट्रो शहरों से कम हैं। अगस्त 2025 में 12,354 शिकायतों में से केवल 18% महिलाओं से जुड़ी थीं। पुलिस पैट्रोलिंग में देहरादून का स्कोर 33% था, जो सर्वे में पहले स्थान पर आए कोहिमा (11%) से बेहतर है।
ट्रैफिक अव्यवस्था और चुनौतियां
देहरादून की ट्रैफिक समस्या भी गंभीर है। बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या से सड़कें संतृप्त हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एलिवेटेड रोड्स समस्या का समाधान नहीं हैं, क्योंकि वे ट्रैफिक को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट कर देते हैं। इसके बजाय, मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पैदल चलने योग्य इंफ्रास्ट्रक्चर और साइकिलिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। डेहरादून सिटीजंस फोरम के सेशन में ट्रांसपोर्ट स्ट्रैटेजिस्ट अमित बागेल ने कहा, “वाइड रोड्स से इंड्यूस्ड डिमांड बढ़ती है, जिससे और कंजेशन होता है।” समाधान के रूप में डेटा-ओरिएंटेड ट्रैफिक सिग्नल, अधिक बसें, फ्लाईओवर (जैसे राजपुर रोड से सहस्रधारा रोड तक) और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 2025 में एलिवेटेड डबल-डेकर बस सिस्टम का सुझाव दिया था।
SSP डोभाल ने ट्रैफिक मैनेजमेंट पर जोर देते हुए प्रभावी गश्त, त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय का वादा किया। उन्होंने कहा कि असुरक्षा की भावना को दूर करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
