Tuesday, March 31, 2026
Homeउत्तराखंडऋषिकेश का ओशो गंगा धाम कानून के भंवर में

ऋषिकेश का ओशो गंगा धाम कानून के भंवर में

ऋषिकेश: मुनिकीरेती स्थित प्रसिद्ध ओशो गंगा धाम (जानकी कुटिया) की मुश्किलें अब कानूनी मोर्चे पर बेहद बढ़ गई हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल की गई विभिन्न सरकारी विभागों की संयुक्त जांच रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, आश्रम परिसर में न केवल 0.257 हेक्टेयर (लगभग 2570 वर्ग मीटर) मूल्यवान वन भूमि पर अवैध कब्जे की बात सामने आई है, बल्कि यहां पर्यावरण संरक्षण, अग्नि सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मानकों की भी खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। मामले में ट्रिब्यूनल के कड़े रुख को देखते हुए आश्रम के अवैध निर्माण पर जल्द ही प्रशासनिक हथौड़ा चलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

सरकारी जमीनों पर कब्जा 

नरेंद्र नगर के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) दिगंत नायक की ओर से न्यायालय में पेश हलफनामे ने अवैध निर्माण की पोल खोल दी है। हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि जानकी कुटिया को अतीत में मात्र 0.289 हेक्टेयर भूमि का पट्टा (लीज) आवंटित किया गया था। लेकिन जब राजस्व एवं वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर संयुक्त पैमाइश की, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।

वर्तमान में आश्रम का कुल घेराव 0.4146 हेक्टेयर भूमि पर फैला हुआ है। रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई है कि कुल क्षेत्रफल में से 0.257 हेक्टेयर वन भूमि पूरी तरह से अवैध कब्जे में है। इस गंभीर उल्लंघन को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारतीय वन अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पट्टा धारक की मृत्यु के बाद लीज भी अवैध!

मामले में एक और बड़ा कानूनी पेच सामने आया है, जिसने आश्रम के प्रबंधन को बैकफुट पर धकेल दिया है। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस बेशकीमती जमीन की लीज स्वामी विवेकानंद दास के नाम पर थी, जिनकी साल 2011 में ही मृत्यु हो चुकी है।

वन विभाग ने ट्रिब्यूनल को कड़े शब्दों में बताया कि सरकारी लीज नीति के कड़े नियमों के तहत यह पट्टा ‘अहस्तांतरणीय’ (नॉन-ट्रांसफरएबल) था। इसका सीधा मतलब यह है कि मूल पट्टा धारक की मृत्यु के बाद इस जमीन को न तो किसी अन्य ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर किया जा सकता था और न ही इसे विरासत के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता था। विभाग अब इस पूरी लीज को ही अवैध मानकर चल रहा है।

प्रदूषण और सुरक्षा मानकों की खुली पोल

पर्यावरण और जनसुरक्षा के लिहाज से भी ओशो गंगा धाम की लापरवाही उजागर हुई है। एनजीटी के सख्त निर्देशों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खाद्य सुरक्षा विभाग और दमकल विभाग की एक संयुक्त टीम ने आश्रम का सघन भौतिक निरीक्षण किया था।

बीते साल 4 अक्टूबर को ट्रस्ट के अधिकृत प्रतिनिधि स्वामी प्रेम चैतन्य की मौजूदगी में यह पूरी पड़ताल की गई थी। इस विस्तृत जांच में पाया गया कि आश्रम न केवल अपनी तय व्यावसायिक सीमाओं को लांघ रहा था, बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट, फायर फाइटिंग सिस्टम और किचन हाइजीन से जुड़े बुनियादी सुरक्षा नियमों की भी धज्जियां उड़ा रहा था। ट्रिब्यूनल ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है और मामले की अगली निर्णायक सुनवाई अप्रैल माह में मुकर्रर की गई है।

RELATED ARTICLES