Sunday, November 23, 2025
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कुमाऊं की गौला और नंधौर नदी में खनन अवधि बढ़ी

रुद्रपुर : कुमाऊं मंडल की सबसे बड़ी गौला और नंधौर नदी से उपखनिज निकासी की अवधि को सरकार ने 19 जून तक बढ़ा दिया है। यह निर्णय इस साल खनन सत्र के दौरान निर्धारित राजस्व लक्ष्य पूरा न हो पाने और स्थानीय लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मूल रूप से खनन कार्य 31 मई को समाप्त होना था, लेकिन अब 19 दिनों का विस्तार करने से सरकार को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने के साथ ही हजारों मजदूरों और खनन कारोबारियों को राहत मिली है।

लक्ष्य से पिछड़ा था खनन कार्य

इस साल गौला नदी से 39 लाख घन मीटर और नंधौर नदी से 6.38 लाख घन मीटर उपखनिज निकालने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, अब तक गौला से केवल 30.12 लाख घन मीटर (लक्ष्य का 77%) और नंधौर से 3.80 लाख घन मीटर (लक्ष्य का 60%) ही निकासी हो पाई है। इसके चलते सरकार को गौला से 98 करोड़ रुपये और नंधौर से 10.66 करोड़ रुपये का ही राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि अपेक्षा इससे कहीं अधिक थी।

मौसम और हड़ताल रहे मुख्य वजह

डीएलएम वन विकास निगम के अधिकारी धीरेश बिष्ट के अनुसार, इस बार खनन कार्य देरी से शुरू होने और कारोबारियों की हड़ताल के कारण लक्ष्य प्राप्ति प्रभावित हुई। साथ ही, मानसून से पहले नदियों को अव्यवस्थित खनन से बचाने के नियमों के तहत 31 मई के बाद खनन प्रतिबंधित होता है। लेकिन, शासन स्तर पर हुई बैठक में मौसम विभाग की सिफारिशों और स्थानीय हितों को ध्यान में रखते हुए अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

20 हजार मजदूरों को मिलेगा लाभ

गौला नदी में प्रतिदिन 7,000 से अधिक वाहन और 2,000 घोड़ा बग्गी के साथ 20,000 मजदूर खनन कार्य में जुटे हैं। अवधि बढ़ने से इन सभी को अतिरिक्त 19 दिनों का रोजगार मिलेगा। वहीं, नंधौर नदी से जुड़े सैकड़ों श्रमिकों और ठेकेदारों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। खनन कारोबारी संघ के प्रतिनिधि ने कहा, “यह निर्णय समय पर आया है। अब हम लक्ष्य पूरा करने की कोशिश करेंगे।”

मानसून से पहले होगा कार्य समाप्त

नई समयसीमा के तहत 19 जून तक खनन कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मानसून सत्र में नदियों को प्राकृतिक रूप से स्वच्छ होने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का मौका मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि अतिरिक्त समय में गौला से 8-9 लाख घन मीटर और नंधौर से 2.5 लाख घन मीटर उपखनिज निकाला जा सकेगा, जिससे राजस्व में 30-40 करोड़ रुपये तक की वृद्धि होगी।

इस प्रकार, सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी गति देगा।

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