Saturday, January 24, 2026
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हाउस आफ हिमालयाज’ के तहत कृषि उत्पादों के निर्यात में जनपदों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता- गर्ब्याल

सचिव ग्राम्य विकास  धीराज सिंह गर्ब्याल ने मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना] मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम] और वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से संबंधित योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की। इस बैठक में जनपदों द्वारा स्वीकृति के लिए भेजी गई कार्य योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। श्री गर्ब्याल ने सभी जनपदों को निर्देशित किया कि पिछले वर्ष तक स्वीकृत योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल पूरा किया जाए।

सचिव ने सभी मुख्य विकास अधिकारियों से कहा कि प्रस्तावित योजनाओं की इकाई लागत को विभागीय मानदंडों के अनुसार ही निर्धारित किया जाए। इससे न केवल योजनाओं की दक्षता बढ़ेगी बल्कि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग भी सुनिश्चित होगा।

जनपदों द्वारा मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना] मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम] और वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण से संबंधित प्रस्तावित की गई योजनाओं पर उन्होंने सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम एन0एस0क्यू0एफ0 मानदंडों के अनुसार प्रस्तावित किये जाये । कौशल विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित सामान्य लागत मानकों का पालन होना चाहिए। विशेष रूप से ऐसे प्रशिक्षण जिन्हें आरसेटी के माध्यम से किया जा सके] उन्हें आरसेटी के तहत प्रस्तावित किया जाना चाहिए। यदि किसी विशेष विषय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता हो तो इसे मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से कार्यान्वित किया जाना चाहिए। सचिव ग्राम्य विकास द्वारा विभागीय अधिकारियों को रोजगार तथा स्वरोजगार परक प्रशिक्षणों की आवश्यकता के आंकलन हेतु स्क्लि गैप एनालिसिस तत्काल कराये जाने के निर्देश दिये गये, ताकि युवाओं की आकांक्षा का आंकलन करते हुये तदनुसार ही ग्रामीण युवाओ एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा सके।

सचिव ग्राम्य विकास ने हा विभागीय अधिकारियों को विभिन्न रोजगार और स्वरोजगार परक सेक्टर्स की प्रशिक्षण आवश्यकताओं का मूल्यांकन करने के लिए स्किल गैप एनालिसिस तत्काल कराये जाने के निर्देश दिये गये । उन्होंने टूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी, रिटेल सर्विसेज, सूचना प्रौद्योगिकी,  हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, ऐपेरल, कृषि एवं बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रीन जॉब्स आदि सेक्टर और गैर-कृषि सेक्टर पर ध्यान केन्द्रित करने के निर्देश् जनपदों को दिये । सचिव ने स्पष्ट किया कि यह विश्लेषण ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को समझने में सहायक होगा जिससे उन्हें सही व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल के माध्यम से युवाओं की अपेक्षाओं का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा, और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को भी आवश्यक कौशल प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, सचिव ने निर्देश दिये कि सभी जनपदों को बेरोजगार युवाओं का डेटा सेवायोजन विभाग से एकत्र करना चाहिए। इस डेटा का उपयोग करते हुए, गैप एनालिसिस को अधिक प्रभावी बनाने के लिये उपयोग किया जाये ताकि प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ जा सके। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य अधिकतम युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण स्तर पर बेरोजगारी को कम किया जा सकेगा। सचिव ने अधिकारियों से यह भी कहा कि उन्हें स्थानीय उद्योगों और व्यवसायों की आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग मानकों के अनुरूप विकसित किए जा सकें, जिससे युवाओं को बेहतर नौकरी के अवसर मिल सकें और ग्रामीण विकास को गति मिले।

इसके अलावा श्री गर्ब्याल ने हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के तहत कृषि उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया पर भी ध्यान केंद्रित करने के निर्देश । उन्होंने सभी जनपदों को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित करें कि पीजीएस के अन्तर्गत कृषिकरण को एन0पी0ओ0पी0  और एन0ओ0पी स्तर पर लाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना एन0पी0ओ0पी0 और एन0ओ0पी0 प्रमाणन के कृषि उत्पादों का निर्यात संभव नहीं है] इसलिए प्रत्येक जनपद को अपने विकासखण्ड या क्लस्टर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एन0पी0ओ0पी0 और एन0ओ0पी0 प्रमाणन मानकों के अनुसार कृषिकरण तथा औद्यानिकीकरण आरंभ करने किये जाने के निर्देश दिये गये। सभी जनपदों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे पी0जी0एस0] एन0पी0ओ0पी0 और एन0ओ0पी0 के अनुसार कृषि तथा औद्यानिकी कार्य करने वाले गांवों/कल्स्टरों की सूची विभाग को प्रस्तुत करें] ताकि इन क्लस्टरों का नियमित रूप से अनुश्रवण किया जा सके एवं इन गांवों/कल्स्टरों के उत्पादों का पायलेट आधार पर हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के तहत निर्यात किये जाने के समुचित प्रयास किये जा सके।

श्री गर्ब्याल ने बताया कि राज्य सरकार की यह  पहल न केवल क्षेत्रीय कृषि को सुदृढ़ बनाने का प्रयास होगा अपितु राज्य के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी होगा । सचिव ने स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण विकास की दिशा में काम करने के लिए जनपदों से प्राथमिकता देने की उम्मीद जताई है।

सचिव ने सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम और वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत पर्यटन से संबंधित समेकित योजनाओं को तैयार करने और उन्हें राज्य को भेजने के निर्देश दिए] जिसमें कृषि] बागवानी] और पशुपालन से संबंधित क्रियाकलापों को शामिल किया जाए। सभी जनपदों को निर्देश दिया गया कि वे संशोधित कार्य योजनाओं को अगले सप्ताह तक राज्य को स्वीकृति हेतु भेजें।

इस बैठक में अपर सचिव श्रीमती अनुराधा पाल] संयुक्त विकास आयुक्त संजय सिंह] परियोजना प्रबंधन अधिकारी डॉ0 प्रभाकर बेबनी और सभी मुख्य विकास अधिकारी शामिल हुए।

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