रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड): करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र केदारनाथ धाम में इस वर्ष स्वच्छता को लेकर अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं। यात्रा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हुए पर्यावरण मित्रों की टीमें दिन-रात तैनात हैं। इस बार 18 दिन की यात्रा अवधि में अब तक 30 कुंतल कूड़ा एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया है, जिसमें प्लास्टिक कचरे के साथ-साथ घोड़े-खच्चरों की लीद को भी अलग से प्रबंधित किया जा रहा है1।
24×7 स्वच्छता: पर्यावरण मित्रों की ड्यूटी
यात्रा मार्ग पर प्रत्येक एक किलोमीटर पर 10 पर्यावरण मित्र तैनात किए गए हैं, जो शिफ्ट सिस्टम के तहत काम कर रहे हैं। इनकी जिम्मेदारी न केवल कचरा एकत्र करना है, बल्कि यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करना है। रात्रि के समय भी सफाई अभियान जारी रहता है, ताकि देर रात पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। सीतापुर से केदारनाथ तक के मार्ग पर 250 से अधिक स्थाई और अस्थाई शौचालय बनाए गए हैं, जिनमें कई जगह गर्म पानी की व्यवस्था भी की गई है1।
कचरा प्रबंधन: सोनप्रयाग में प्लांट का निर्माण
प्लास्टिक कचरे और जैविक अवशिष्टों के निस्तारण के लिए सोनप्रयाग में विशेष प्लांट स्थापित किए गए हैं। दिनभर एकत्र किए गए कचरे को शाम तक, जबकि रात के कचरे को सुबह सोनप्रयाग पहुंचाया जाता है। अब तक 30 कुंतल प्लास्टिक कचरे का निस्तारण किया जा चुका है। इसके अलावा, घोड़ों और खच्चरों की लीद को अलग से एकत्र कर उसे जैविक खाद में बदलने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है1।
यात्रियों का रिकॉर्ड आंकड़ा: 4 लाख से अधिक दर्शन
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में अब तक 4 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है। भीड़ प्रबंधन के लिए टोकन प्रणाली लागू की गई है, जिससे यात्रियों को पंक्तिबद्ध तरीके से दर्शन कराए जा रहे हैं। तीर्थ पुरोहित समाज के राजकुमार तिवारी के अनुसार, “मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग हर समय स्वच्छ रहता है, जिससे यात्रियों को सुरम्य वातावरण में दर्शन का अनुभव मिल रहा है”1।
जनभागीदारी और जागरूकता अभियान
स्थानीय लोगों और यात्रियों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पर्यावरण मित्र यात्रियों को शपथ दिला रहे हैं कि वे प्लास्टिक का उपयोग न करें और कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें। इसके साथ ही, ‘डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण’ प्रणाली भी लागू की गई है, जिसके तहत यात्रा पड़ावों और होटलों से कचरा नियमित रूप से उठाया जा रहा है1।
सरकारी और निजी साझेदारी
इस स्वच्छता अभियान में जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन, अनुभूति वेलफेयर फाउंडेशन, और रिसाइकल जैसी संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इनके सहयोग से प्लास्टिक कचरे के रीसाइक्लिंग और नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए तकनीकी समाधान अपनाए गए हैं115। साथ ही, नमामि गंगे परियोजना के तहत हिमालयी क्षेत्र की नदियों की सफाई को प्राथमिकता दी जा रही है15।
केदारनाथ धाम में स्वच्छता के ये प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि तीर्थयात्रियों के अनुभव को भी बेहतर बना रहे हैं। सरकार, निजी संस्थाओं और स्थानीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों से यह अभियान एक मिसाल बन गया है, जो पर्यटन और धार्मिक यात्राओं में स्वच्छता के नए मानक स्थापित कर रहा है।
