Wednesday, April 1, 2026
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नामिक ग्लेशियर ट्रेक एडवेंचर प्रेमियों का पसंदीदा स्पॉट बना

बागेश्वर: कुमाऊं हिमालय की गोद में बसा नामिक ग्लेशियर ट्रेक एडवेंचर प्रेमियों के लिए नया आकर्षण बन गया है। बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों की सीमा पर स्थित यह ट्रेक अपने प्राकृतिक सौंदर्य, मध्यम कठिनाई स्तर और भव्य हिमालयी दृश्यों के कारण नए से लेकर अनुभवी ट्रेकर्स तक सभी को लुभा रहा है। वरिष्ठ पर्वतारोही भुवन चौबे के अनुसार, यह मार्ग पूर्वी रामगंगा के उद्गम क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सड़क पहुंची नामिक गांव तक, अब ट्रेक हुआ सुलभ
कुछ साल पहले तक नामिक ग्लेशियर ट्रेक तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता था, लेकिन अब नामिक गांव तक सड़क सुविधा पहुंचने से यह ट्रेक काफी हद तक आसान हो गया है। ट्रेक की शुरुआत आमतौर पर बागेश्वर से वाहन द्वारा गोगिना गांव तक की जाती है। इसके बाद नामिक गांव, थल टॉप और सुदामखान जैसे खूबसूरत पड़ाव आते हैं। सड़क सुविधा ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में भी धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है।

60 से 80 किलोमीटर का रोमांचक सफर
करीब 60 से 80 किलोमीटर (आने-जाने सहित) के इस ट्रेक में ट्रेकर्स अधिकतम लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचते हैं। हालांकि, असली रोमांच अंतिम दिन का होता है जब ग्लेशियर के जीरो पॉइंट तक करीब पांच किलोमीटर का पैदल सफर तय करना होता है। यह हिस्सा सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है—यहाँ ऊंचाई, मौसम में अचानक बदलाव और संकरे रास्ते ट्रेकिंग के असली अनुभव को जीवंत कर देते हैं। स्थानीय गाइड बताते हैं कि यह खंड नए ट्रेकर्स को धैर्य और सहनशक्ति का पाठ पढ़ा जाता है।

बुग्यालों में खिलते रंग-बिरंगे फूल 
नामिक ग्लेशियर ट्रेक की सबसे बड़ी विशेषता है इसके रास्ते में बिछे बुग्याल। घने जंगलों को पार करते हुए जब ट्रेकर्स इन ऊंचे घास के मैदानों में पहुंचते हैं, तो रंग-बिरंगे फूलों से सजी यह धरती किसी स्वप्न से कम नहीं लगती। शांत पहाड़ी बस्तियाँ, देवदार और बांज के घने वन, और बीच-बीच में झरनों की सरसराहट इस ट्रेक को एक अलग ही आयाम देते हैं।

साफ मौसम में खुलता है हिमालय का कैनवास
इस ट्रेक की सबसे बड़ी खासियत है यहां से दिखने वाला हिमालय का विहंगम दृश्य। मौसम साफ रहने पर ट्रेकर्स को पंचचूली, नंदा कोट और आसपास की अन्य ऊंची चोटियों के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इन चोटियों पर पड़ने वाली सुनहरी रोशनी हर ट्रेकर के कैमरे में कैद होने वाले यादगार पलों में शुमार हो जाती है। वरिष्ठ पर्वतारोही भुवन चौबे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह ट्रेक पूर्वी रामगंगा नदी के उद्गम क्षेत्र के आसपास स्थित माना जाता है, जिससे इसकी भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्ता और भी बढ़ जाती है।

ट्रेक का सही समय: मई-जून और सितंबर-नवंबर
विशेषज्ञों के अनुसार, नामिक ग्लेशियर ट्रेक के लिए मई-जून और सितंबर से नवंबर की शुरुआत तक का समय सबसे उपयुक्त होता है। इन महीनों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है, रास्ते सुरक्षित होते हैं और आसमान साफ होने से हिमालय की चोटियों के दर्शन भी पूरी तरह हो पाते हैं। बरसात के मौसम में भूस्खलन का खतरा बना रहता है, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यहां ट्रेकिंग जोखिम भरी हो सकती है।

नए ट्रेकर्स के लिए सलाह: सही गियर और गाइड जरूरी
हालांकि नामिक ग्लेशियर ट्रेक को मध्यम स्तर का माना जाता है, लेकिन नए ट्रेकर्स के लिए यह आवश्यक है कि वे पूरी तैयारी के साथ निकलें। पर्याप्त फिटनेस, मौसम के अनुकूल गियर, वॉटरप्रूफ जूते और गर्म कपड़े अनिवार्य हैं। स्थानीय गाइड की मदद लेना भी सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी है। अनुभवी ट्रैकिंग ग्रुप्स की सहायता लेने से यात्रा न केवल सुरक्षित बनती है, बल्कि ट्रेक के दौरान स्थानीय पारिस्थितिकी और संस्कृति की गहरी समझ भी मिलती है।

पर्यटन की नई संभावनाओं से गदगद लोग
नामिक गांव तक सड़क पहुंचने और ट्रेक की बढ़ती लोकप्रियता से स्थानीय लोगों में उत्साह है। होमस्टे, छोटी दुकानें और गाइड सेवाएं ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर खोल रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पर्यटन से जहां अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है, वहीं यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि ट्रेकिंग के दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान न हो। प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता अब इस ट्रेक का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

प्रकृति, रोमांच और सीख का संगम
नामिक ग्लेशियर ट्रेक केवल एडवेंचर का माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के करीब जाने, पहाड़ी जीवन को समझने और ट्रेकिंग की बारीकियां सीखने का भी शानदार अवसर प्रदान करता है। यहां का शांत वातावरण, ऊंची चोटियों की गरिमा और स्थानीय समुदाय की गर्मजोशी हर आगंतुक के मन पर एक अमिट छाप छोड़ जाती है।

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