Tuesday, March 31, 2026
Homeउत्तराखंडउत्तराखंड में बिजली संकट गहराया 492 यूनिट की भारी कमी

उत्तराखंड में बिजली संकट गहराया 492 यूनिट की भारी कमी

देहरादून: उत्तराखंड में बिजली की मांग और उत्पादन के बीच बढ़ता अंतर अब संकट का रूप ले चुका है। मार्च महीने में राज्य की कुल बिजली मांग 1079.92 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई, जबकि उपलब्ध आपूर्ति काफी कम रही। इस अंतर को पूरा करने के लिए बाहरी बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी। ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि जलविद्युत उत्पादन में कमी और बढ़ती औद्योगिक-सिंचाई मांग ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

ऊर्जा निगम के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में राज्य का अपना उत्पादन (जलविद्युत को छोड़कर) मात्र 218.30 मिलियन यूनिट रहा। केंद्रीय और अन्य हिस्सेदारी मिलाकर कुल उपलब्धता 587.88 मिलियन यूनिट तक सीमित रही। नतीजा, पूरे महीने 492.03 मिलियन यूनिट की भारी कमी दर्ज की गई। औसतन दैनिक मांग करीब 40 मिलियन यूनिट थी, जबकि उपलब्धता सिर्फ 21.77 मिलियन यूनिट के आसपास रही।

12 मार्च को संकट चरम पर पहुंचा। उस दिन 21.53 मिलियन यूनिट की कमी सामने आई। बाजार से 15.12 मिलियन यूनिट बिजली खरीदनी पड़ी। महीने के दूसरे हिस्से में उत्पादन कई दिनों तक घटकर 6-7 मिलियन यूनिट प्रतिदिन रह गया, जबकि मांग 42-44 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई।

बढ़ता तापमान, औद्योगिक गतिविधियां और सिंचाई की जरूरतों ने मांग को तेजी से बढ़ाया। दूसरी ओर, नदियों में पानी का स्तर गिरने से जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ। उत्तराखंड मुख्य रूप से जलविद्युत पर निर्भर है, इसलिए मौसमी कमी सीधे प्रभाव डाल रही है।

कमी कैसे पूरी की गई

  • बिजली विनिमय केंद्र से 150.39 मिलियन यूनिट खरीदी गई।
  • बैंकिंग व्यवस्था के तहत अन्य राज्यों से 341.02 मिलियन यूनिट प्राप्त की गई।
  • कुछ दिनों में ओवर-ड्रॉ और अंडर-ड्रॉ के जरिए ग्रिड को संतुलित रखा गया।

इस पूरी खरीदारी पर ऊंची दरें चुकानी पड़ीं। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च लागत का बोझ अब उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

आने वाले दिनों में चुनौती

अप्रैल-मई में गर्मी बढ़ने के साथ मांग और ऊंचाई पर पहुंचने की आशंका है। यदि जल स्तर में सुधार नहीं हुआ तो संकट और गहरा सकता है। राज्य सरकार अतिरिक्त स्रोतों से बिजली जुटाने के प्रयास कर रही है, लेकिन महंगी खरीद लंबे समय तक टिकाऊ समाधान नहीं है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि नई जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और ट्रांसमिशन लॉस कम करना जरूरी है। फिलहाल, मार्च की रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाए बिना संकट नियंत्रण में रहना मुश्किल होगा।

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने उपभोक्ताओं से बचत का आह्वान किया है। गैर-जरूरी उपकरणों का कम इस्तेमाल और दिन के समय सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग मदद कर सकता है। यह संकट सिर्फ एक महीने की समस्या नहीं है। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगिक विकास के साथ मांग लगातार बढ़ रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो गर्मियों में कटौतियां बढ़ सकती हैं।

RELATED ARTICLES