Thursday, March 26, 2026
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चमोली और रुद्रप्रयाग की ठेका फर्म ने किया 9.72 करोड़ का गबन

चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों की एक ठेका फर्म ने कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में 9.72 करोड़ रुपये जमा नहीं किए। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कंपनी ने ईपीएफ मद में कर्मचारियों का हिस्सा काटकर भी जमा नहीं किया। अब इस मामले में ईपीएफ संगठन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

 उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग में संचालित एक ठेका फर्म पर कर्मचारियों के भविष्य निधि (ईपीएफ) के 9.72 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप लगा है। कंपनी ने ठेका कार्यों के दौरान मजदूरों की सैलरी से ईपीएफ का हिस्सा काटा, लेकिन उसे संबंधित खातों में जमा नहीं किया। यह राशि वर्ष 2017 से अब तक की है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि ठेका मजदूरों का ईपीएफ योगदान मुख्य ठेकेदार की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद चमोली-रुद्रप्रयाग की इस फर्म ने नियमों की अनदेखी की। ईपीएफ अधिकारी अब इस मामले में फर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।

फर्म के मालिक ने 9.72 करोड़ रुपये की राशि को अपने खाते में रख लिया। इसमें कर्मचारियों का योगदान और नियोक्ता का अंश दोनों शामिल हैं। इस वजह से हजारों मजदूरों का भविष्य प्रभावित हो गया है। कई मजदूर अब सेवानिवृत्ति के बाद भी अपना पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं।

ईपीएफ संगठन ने इस मामले में फर्म को नोटिस जारी किया है। साथ ही बकाया राशि वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगर फर्म समय पर भुगतान नहीं करती तो संपत्ति कुर्की और अन्य सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

चमोली और रुद्रप्रयाग की यह घटना ठेका प्रथा में बढ़ती अनियमितताओं को उजागर करती है। ठेका फर्में अक्सर मजदूरों के हितों की अनदेखी करती हैं। ईपीएफ मद में 9.72 करोड़ रुपये का चूना लगाने का मामला ऐसे कई अन्य मामलों का उदाहरण बन गया है।

इस मामले में जिला प्रशासन और श्रम विभाग भी सक्रिय हो गए हैं। मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है। ईपीएफ अधिकारी ने कहा कि किसी भी हाल में कर्मचारियों का पैसा उन्हें दिलाया जाएगा।

 9.72 करोड़ रुपये के ईपीएफ घोटाले ने उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में ठेका मजदूरों में आक्रोश पैदा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराने और मजदूरों के हक की रक्षा के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। इस मामले की जांच तेजी से पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे उदाहरण न बनें।

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