Tuesday, December 9, 2025
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अल्मोड़ा में विकसित होगा नगर वन

अल्मोड़ा : कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में पर्यटन को नई दिशा देने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसारदेवी के समीप स्थित सिमतोला ईको पार्क को वन विभाग द्वारा नगर वन के रूप में विकसित किया जाएगा। 26 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस पार्क का विकास कार्य एक करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जिससे न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेज दी गई है और जल्द ही बजट स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।

अल्मोड़ा, जो हिमालय की तलहटी में बसा एक प्राचीन नगर है, लंबे समय से अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां की पहाड़ियां, घने जंगल और मंदिर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन बेहतर सुविधाओं के अभाव में कई आकर्षण अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते। सिमतोला पार्क, जो कसारदेवी—जिसे बॉब डायलन और जॉर्ज हैरिसन जैसे विश्व प्रसिद्ध कलाकारों ने लोकप्रिय बनाया—के नजदीक स्थित है, एनएच-109 पर सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा और कसारदेवी के बीच एनटीपीसी कपड़खाना मार्ग पर बसा है। हर वर्ष यहां हजारों देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन पार्क में बुनियादी सुविधाओं जैसे बैठने की व्यवस्था, जलपान और मनोरंजन के साधनों के अभाव में वे ज्यादा देर टिक नहीं पाते। उप वन संरक्षक अल्मोड़ा दीपक सिंह ने बताया, “यह पार्क पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाओं से भरा है। नगर वन के रूप में विकसित होने से यह न केवल पर्यटकों का प्रमुख पड़ाव बनेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।”

नगर वन योजना, जो केंद्र सरकार की ‘नागर वन’ पहल का हिस्सा है, शहरी क्षेत्रों में हरे-भरे स्थानों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी शहरों में यह योजना विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण के कारण हरियाली कम हो रही है। सिमतोला पार्क का विकास कार्य इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। अधिकारियों के अनुसार, एक करोड़ रुपये के बजट में पार्क को बहुउद्देशीय पर्यटन केंद्र के रूप में ढाला जाएगा। इसमें बच्चों के लिए बोटिंग जोन, युवाओं के लिए सेल्फी पॉइंट्स और वॉकिंग ट्रेल्स, तथा बुजुर्गों के लिए आरामदायक बेंच और छायादार क्षेत्र शामिल होंगे। इसके अलावा, पार्क में फव्वारे, फूलों की क्यारियां, जड़ी-बूटियों का उद्यान और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण भी किया जाएगा। “हमारा लक्ष्य है कि पर्यटक यहां कम से कम दो-तीन घंटे रुकें और अल्मोड़ा की प्राकृतिक छटा का भरपूर आनंद लें,” सिंह ने कहा।

पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह परियोजना स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाने पर भी जोर देगी। नगर वन योजना के तहत पार्क में छोटे-छोटे स्टॉल लगाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। ये समूह स्थानीय हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, चाय-कॉफी और स्नैक्स बेच सकेंगे, जिससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जहां स्वादिष्ट पहाड़ी व्यंजन जैसे आलू के गुटके, भट्ट की चुरकानी और कुमाऊंनी थाली परोसी जाएगी। इससे एक ओर पर्यटकों को सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कारीगरों और किसानों की आय में वृद्धि होगी। अल्मोड़ा जिले में पहले से ही कई महिला समूह सक्रिय हैं, जो पर्यटन से जुड़े उत्पाद बनाते हैं। इस परियोजना से इनकी पहुंच बढ़ेगी और आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।

अल्मोड़ा का पर्यटन उद्योग पहले से ही राज्य अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2024 में यहां लगभग 15 लाख पर्यटक आए थे, जिनमें 20 प्रतिशत विदेशी थे। कसारदेवी, जो तंत्र-मंत्र और ध्यान के लिए प्रसिद्ध है, हर वर्ष बॉलीवुड सितारों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को खींचता है। सिमतोला पार्क का विकास इस पर्यटन सर्किट को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सुविधाओं से पर्यटकों की औसत रहने की अवधि बढ़ेगी, जिससे होटल, ट्रांसपोर्ट और हस्तशिल्प उद्योग को लाभ होगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह कदम सराहनीय है। नगर वन से जैव विविधता संरक्षण होगा, कार्बन अवशोषण बढ़ेगा और शहरी गर्मी कम होगी। वन विभाग ने योजना में सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग और वर्षा जल संचयन को भी शामिल किया है, जो सतत विकास का उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं। पहाड़ी इलाके होने से निर्माण कार्य मौसम पर निर्भर करेगा, और भूमि प्रबंधन तथा स्थानीय सहमति सुनिश्चित करनी होगी। लेकिन विभाग का दावा है कि स्थानीय समुदाय को प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाएगा। डीपीआर में इन सभी पहलुओं का समावेश है, और शासन से त्वरित स्वीकृति की अपेक्षा है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो 2026 के मध्य तक पार्क पर्यटकों के लिए खुल जाएगा। उप वन संरक्षक सिंह ने कहा, “यह केवल एक पार्क का विकास नहीं, बल्कि अल्मोड़ा को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने का प्रयास है।”

कुल मिलाकर, सिमतोला नगर वन अल्मोड़ा के पर्यटन और आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाला साबित होगा। यह परियोजना न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करेगी, बल्कि स्थानीय महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाएगी। कुमाऊं की इस हरी वादी में पर्यटन की नई लहर उठने वाली है, जो अल्मोड़ा को एक आदर्श इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में चमकाएगी। उम्मीद है कि जल्द ही यहां पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था फले-फूलेगी।

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